पहाड़ और पगडंडी

पगडंडी सिर्फ़ पहाड़ के छोटे छोटे रास्तों का नाम नहीं, बल्कि यह उन कहानियों की आवाज़ है जो पहाड़ की मिट्टी में गूंजती हैं। यह उन धुनों का एहसास है जो पहाड़ी संगीत में बजता हैं। यह उन शब्दों की अभिव्यक्ति है जो लोक साहित्य और परंपराओं में जीवंत हैं।

हमारा उद्देश्य है कि सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा, साहित्य और संगीत को जीवंत रखा जाए। "पगडंडी" उन भूले-बिसरे लोकगीतों, रीति-रिवाजों और जनसंघर्षों की कहानी कहने का प्रयास है, जिन्हें समय की धूल ने ढक दिया है।

हमारी यह यात्रा आपको पहाड़ की आत्मा से जोड़ने की कोशिश है—चाहे वह यहां की अनसुनी लोककथाएं हों, घाटियों में गूंजती न्योली,जागर (पारंपरिक गीत) हों, अथवा पहाड़ी जनजीवन की कठिनाइयां और संवेदनाएं हों। आइए, "पगडंडी" के इस सफर में हमारे साथ कदम से कदम मिलाइए और पहाड़ की असली पहचान को संजोए रखिए।

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